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पुलिस का अनुभव कैसा रहा: समीक्षा के लिए पुलिस स्टेशनों पर क्यूआर कोड लगाए गए

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मुंबई – नागरिकों को अक्सर पुलिस स्टेशनों पर अच्छे या बुरे अनुभव होते हैं। कई बार आम नागरिकों की शिकायतों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया जाता। यह अनुभव अब सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया जा सकेगा। इसके लिए पुलिस थानों में ‘क्यूआर कोड’ लगाने का निर्णय लिया गया है। आम नागरिक इस क्यूआर कोड के जरिए अपने अनुभव, शिकायतें और सुझाव अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे।

आम नागरिक विभिन्न शिकायतें लेकर पुलिस स्टेशन जाते हैं। लेकिन पुलिस स्टेशन में उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा। पुलिसकर्मी अक्सर असभ्य होते हैं और उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए भी बार-बार आना पड़ता है। जिसके कारण आम नागरिकों के मन में पुलिस के प्रति गलतफहमियां पैदा होती हैं और पुलिस बल की छवि धूमिल होती है।

इसके लिए पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडेय ने थाने में नागरिकों के अनुभव जानने का निर्णय लिया। इसलिए पुलिस थानों में क्यूआर कोड की पहल शुरू की गई है। इस क्यूआर कोड के माध्यम से, पुलिस स्टेशन आने वाले नागरिक संबंधित पुलिस स्टेशन की रेटिंग कर सकेंगे और तुरंत अपना अनुभव फीडबैक दर्ज कर सकेंगे।

इसके अलावा कुछ बदलाव या सुझाव भी दिए जा सकते हैं। इसलिए पुलिस आयुक्त ने विश्वास व्यक्त किया है कि अब पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद और अधिक प्रभावी होगा।

अपना अनुभव कैसे दर्ज करें?

इस पहल के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन के सामने एक क्यूआर कोड आधारित स्टैंड लगाया जाएगा। इस क्यूआर कोड को मोबाइल पर स्कैनर की मदद से स्कैन करने पर मोबाइल पर एक प्रश्नावली दिखाई देगी। जिसमें नागरिक अपना नाम और संपर्क नंबर दर्ज कराते हैं, पुलिस स्टेशन का क्या काम है? आप किन अधिकारियों से मिले? क्या उन्होंने सहयोग किया, क्या काम पूरा हुआ? इस प्रकार के प्रश्नों से पुलिस स्टेशन के प्रदर्शन और छवि का तत्काल रिकॉर्ड मिल सकता है। थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जवाब देना होगा कि एक नागरिक बार-बार थाने क्यों जाता है और उसका काम क्यों नहीं हो रहा है।

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