Next Story
Newszop

ऐसा गांव जहां घर के आगे नींबू मिर्ची की जगह लोग टांगते हैं लिंग, कहते हैं गुड लक, कपल्स भी खूब आते हैं यहां

Send Push
आपने अभी तक घरों के बाहर नींबू मिर्ची लटके देखे होंगे, जो आपको और आपके घर-बार को बुरी नजरों से बचाते हैं, किसी भी नेगेटिव चीजों से दूर रखते हैं। लेकिन कभी आपने ये सोचा था कि घर के बाहर लोग लिंग भी टांगते होंगे? जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना भूटान में चिमी ल्हाखांग एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो लामा द्रुकपा क्यूनले को समर्पित है, जिन्होंने अपनी ताकतवर लिंग से एक राक्षसी को हराया था। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है, यहां घरों की दीवारों पर अलग-अलग रंगों और सुंदर डिजाइनों में बनी विशाल लिंग की पेंटिंग लगी हुई हैं, मंदिरों के दरवाजों पर बड़े-बड़े लकड़ी के उकेरे हुए लिंग, और छोटे-छोटे लिंग के प्रतीक हैं, जो घरों और दुकानों के दरवाजों पर लगे हैं।

वीडियो में गांव को दिखाने वाली इन्फ्लुएंसर के मुताबिक, चिमी ल्हाखांग भूटान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, जहां महिलाएं संतान प्राप्ति के आशीर्वाद के लिए यहां आती हैं। इसलिए इसे "भूटान का फर्टिलिटी मंदिर" कहा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय लोग मानते हैं कि लिंग की पेंटिंग न केवल प्रजनन (fertility) को बढ़ावा देती हैं, बल्कि बुरी आत्माओं को दूर भगाने और बुरी नजर से बचाने का काम भी करती हैं। शॉक हो गए ना? चलिए आपको इस मंदिर के बारे में थोड़ी और जानकारी देते हैं। (सभी फोटो साभार: wikimedia commons)
चिमी ल्हाखांग का इतिहास image

मंदिर को नवांग चोग्याल ने बनवाया था, जो 14वें द्रुकपा माने जाते थे। मंदिर के अंदर जो स्तूप है, उसको एक योगी ने बनाया था, जिनको वहां 'डिवाइन मैडमैन' के नाम से जाना जाता है। डिवाइन मैडमैन मतलब वो आदमी जो पूरी तरह से भगवान की भक्ति में लीन हो। द्रुकपा कुनली नाम के बौद्ध धर्म गुरु थे, कहते हैं कि वो तिब्बत से भूटान यहां आए थे और अपने साथ भूटान में बौद्ध धर्म को लेकर यहां आए। उनके शिक्षा देने का अंदाजा बड़ा ही अलग था और पागलों के जैसे गया करते थे, इस कारण से उनका डिवाइन मैडमैन कहा जाता था।कहते हैं द्रुकपा कुनली पुनाखा में एक भूत को भगाने के लिए यहां आए थे, उन्होंने लिंग के आकार का डंडा बनाया और उससे भूत पर हमला किया। भूत ने कुत्ते का रूप ले लिया। डिवाइन मैडमैन मरे हुए कुत्ते को स्तूप में ले आए और तब से लिंग को वहां महत्व दिया जाने लगा। तभी वहां गांव में लोगों के घर, दुकान आदि पर भी लिंग की आकृति उकेरी रहती है।


संतान प्राप्ति के लिए प्रसिद्ध है मंदिर ​इस मठ को संतान सुख दिलाने वाली शक्तियों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। इन्फ्लुएंसर का कहना है कि जो भी संतान की इच्छा रखता है, उसे इस मठ में आकर आशीर्वाद मिलता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस प्रजनन मंदिर (फर्टिलिटी टेम्पल) में आते हैं, इस उम्मीद में कि उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलेगा। जो लोग माता-पिता बन चुके होते हैं, वे अपने नवजात बच्चों के लिए एक अच्छा और शक्तिशाली नाम रखने के लिए स्थानीय लामा के पास जाते हैं। अगर आप संतान सुख या आशीर्वाद नहीं चाहते, तब भी आप इस मंदिर में जा सकते हैं। यहां आकर आप भूटानी संस्कृति और इतिहास के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं।

लिंग आत्माओं को दूर भगाते हैं घर की रक्षा करते हैं image

भूटानी संस्कृति में लिंग चिन्हों का गहरा महत्व है। इन्हें फर्टिलिटी का प्रतीक माना जाता है और यह बुरी आत्माओं को दूर भगाने और घरों की रक्षा करने में मदद करते हैं। यह परंपरा खासतौर पर चिमी लाखांग मंदिर के आसपास देखने को मिलती है। मंदिर और आसपास के घरों की दीवारों पर अक्सर लिंग की आकृतियां बनी हैं। ऐसा माना जाता है कि यह द्रुक्पा कुनले की अनोखी लेकिन प्रभावशाली विधियों का प्रतीक हैं, जिनसे नकारात्मक शक्तियों को शांत किया जाता था।


कैसे पहुंचे चिमी ल्हाखांग image

चिमी ल्हाखांग, जिसे भूटान का प्रजनन मंदिर कहा जाता है, लोबेसा गांव पुनाखा में स्थित है। यह पुनाखा जोंग से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है। वहां पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका एक प्राइवेट टैक्सी लेना है।अगर आप पारो या थिंपू से यात्रा कर रहे हैं, तो आप थिंपू या पारो से लोकल बस ले सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कि यहां बसें सिर्फ मुख्य शहरों के बीच ही चलती हैं और रास्ते में रुकती नहीं हैं। ये बस आपको वांगडू बस स्टॉप (जो पुनाखा से करीब 15 किलोमीटर दूर है) तक छोड़ देगी। वहां से आपको आगे जाने के लिए टैक्सी लेनी होगी।


मंदिर जाने के लिए जरूरी टिप्स image
  • प्रजनन मंदिर स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी भावनाओं का सम्मान करें और मंदिर के महत्व को समझें।
  • गांवों में आपको लगभग हर घर की दीवारों पर फैलस चित्र (phallus paintings) देखने को मिलेंगे, साथ ही हस्तशिल्प भी बिकते हुए दिखेंगे। यदि आप बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार मंदिर दर्शन की योजना बना सकते हैं। स्थानीय लोग बिना किसी हिचकिचाहट के अपने बच्चों के साथ इस मंदिर में आते हैं।
  • मंदिर जाते समय कपड़े सही पहनें। क्योंकि इस दौरान आपको धान के खेतों से होते हुए जाना पड़ेगा और लगभग 20 मिनट की हल्की ट्रेकिंग भी करनी होगी।
  • मंदिर में प्रवेश से पहले आपको अपने जूते बाहर निकालने होंगे। साथ ही, मंदिर के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है।
  • मंदिर के अंदर ऊंची आवाज में बात करना वहां की संस्कृति के अनुसार अनुचित माना जाता है, इसलिए कृपया धीरे बोलें।
  • मंदिर के बाहर कई छोटी दुकानें हैं जहां से आप स्मृति चिह्न खरीद सकते हैं।
Loving Newspoint? Download the app now