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पहली प्रेग्नेंसी में 79 पाउंड बढ़ गया था बिल गेट्स की पत्नी का वजन, बच्चे के लिए हो सकती है मुसीबत

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प्रेग्‍नेंसी में वजन बढ़ना आम है। मगर, वजन जरूरत से ज्‍यादा बढ़ जाएं, तो महिलाएं स्‍वीकार नहीं कर पातीं और तनाव में आ जाती हैं। हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट के को फाउंडर बिल गेट्स की पत्‍नी मेलिंडा गेट्स ने अपनी प्रेग्‍नेंसी जर्नी के बारे में खुलासा किया है। उन्‍होंने बताया कि पहली प्रेग्नेंसी में उनका वजन 79 पाउंड तक बढ़ गया था। लेकिन वे इस दौरान नर्वस नहीं हुईं , बल्कि सशक्‍त महसूस करने लगी थीं। अच्‍छी बात तो यह थी कि बढ़े हुए वजन से बच्‍चे को नुकसान नहीं था। हालांकि, जरूरी नहीं कि हर ज्‍यादा वजन वाली महिलाओं के साथ ऐसा हो। कई मामलों में जरूरत से ज्‍यादा वजन मां के साथ बच्‍चे के लिए भी खतरा बन जाता है। इस दौरान शिशु के साथ शोल्‍डर डिस्‍टोसिया जैसी गंभीर समस्‍या हो सकती है। आइए जानते हैं डिलीवरी के दौरान कितना होना चाहिए वजन और ज्‍यादा वजन से शोल्‍डर डिस्को सेटिया कैसे होता है? प्रेग्‍नेंसी में कितना होना चाहिए वजन? अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्‍स्‍टेेट्रिशिश्‍न एंड गायनाकोलजी की गाइडलाइन के अनुसार, प्रेग्‍नेंसी से पहले जिन महिलाओं का वजन नॉर्मल रहता है , वह प्रेग्‍नेंसी के दौरान 25 से 35 पाउंड तक वजन बढ़ा सकती हैं। यानी की 11 से 16 किलो। लेकिन जिन महिलाओं का वजन इससे ज्‍यादा हो, तो उनके ट्विन्स होने की संभावना बढ़ती है साथ ही डिलीवरी के दौरान कई दिक्‍कतें भी आ सकती हैं। क्‍या होता है शोल्‍डर डिस्‍टोसिया?क्‍लीवलैंड क्‍लीनिक के अनुसार, शोल्‍डर डिस्‍टोसिया एक इमरजेंसी कंडीशन है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब डिलीवरी के दौरान बच्‍चे के एक या दोनों कंधे योनि में फंस जाते हैं। वैसे तो ऐसे बच्‍चे आमतौर पर सुरक्षित पैदा होते हैं, लेकिन यह बच्‍चे के लिए गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है। यह समस्‍या जन्‍म के समय 13 औंस से ज्‍यादा वजन वाले बच्‍चों में ज्‍यादा बढ़ जाती है। शोल्‍डर डिस्‍टोसिया का कारण
  • जब बच्‍चे का वजन 8 या 13 पाउंड से ज्‍यादा हो।
  • बच्‍चा गलत पोजीशन में हो।
  • पेल्विक एरिया बहुत छोटा हो।
  • पेल्विक एरिया में जगह बहुत सीमित हो जाए।
शोल्‍डर डिस्‍टाेसिया से बचने के उपाय
  • प्रेग्‍नेंसी के दौरान डायबिटीज मैनेज करें
  • हेल्‍दी वेट मेंटेन करें
  • डिलीवरी के दौरान एपिड्यूरल लेने से बचें।
प्रेग्‍नेंसी में ज्‍यादा वजन के अन्‍य नुकसानप्रेग्‍नेंसी में ज्‍यादा वजन बढ़ने से गर्भपात हो सकता है। इतना ही नहीं इसमें प्री क्‍लैम्‍पसिया, ब्‍लड क्‍लॉट और पोस्‍ट पार्टम वॉटर रिटेंशन जैसी समस्याएं भी हो सकती है। यह स्थिति गर्भस्‍थ्‍य शिशु के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकती है। शोल्‍डर डिस्‍टोसिया के अलावा प्रीटर्म बर्थ, मैक्रोसोमिया और कभी-कभी तो नवजात की मौत का खतरा भी बढ़ जाता है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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