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वक्फ का अंत!...खलीफा उमर को मस्जिद में नमाज पढ़ते समय ईरानी गुलाम ने खंजर घोंपकर क्यों मार डाला, शाह ने क्यों की चर्चा?

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नई दिल्ली: इस्लाम धर्म के दूसरे खलीफा उमर इब्न अल खत्ताब शुरू में इस्लाम के विरोधी थे और मक्का में मुस्लिम समुदाय के सबसे कट्टर और आक्रामक दुश्मनों में से एक थे। इस्लाम में धर्मांतरण से पहले उमर अपनी ताकत, साहस और उग्र स्वभाव के लिए जाने जाते थे। इन्हीं उमर का जिक्र गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल के दौरान चर्चा में किया। उन्होंने कहा कि वक्फ एक अरबी शब्द है जिसका इतिहास कुछ हदीसों से जुड़ा मिलता है। उन्होंने बताया कि वक्फ का अर्थ अल्लाह के नाम पर संपत्ति का दान करना है, जो इस्लाम के दूसरे खलीफा उमर के समय में अस्तित्व में आया था। जानते हैं दूसरे खलीफा उमर के बारे में और शाह ने इनका जिक्र क्यों किया, यह भी समझते हैं। शाह ने वक्फ के साथ-साथ खलीफा का जिक्र क्यों कियाशाह ने यह भी कहा कि वक्फ एक प्रकार का चैरिटेबल एंडोरमेंट है, जहां व्यक्ति पवित्र दान करता है, लेकिन दान केवल उसी चीज का किया जा सकता है जो हमारा है, न कि सरकारी संपत्ति या किसी दूसरे की संपत्ति का। शाह ने इस्लाम धर्म के जिस दूसरे खलीफा उमर का जिक्र किया, दरअसल उनका पूरा नाम उमर इब्न अल-खत्ताब था, जिन्हें उमर महान के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें इस्लाम के दूसरे खलीफा और इस्लामी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण हस्तियों में से एक माना जाता है। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक भारी विरोध के बावजूद पास हो गया और अब इसे राज्यसभा की चुनौती पार करनी होगी। image कुश्ती और तीरंदाजी में माहिर उमर शुरुआत में इस्लाम विरोधी थे584 ईसवी में मक्का में जन्मे उमर शुरू में इस्लाम के विरोधी थे और 616 ईसवी में इस्लाम अपनाने से पहले तक उन्होंने मुसलमानों पर अत्याचार भी किया था। वह मक्का में एक शक्तिशाली कबायली जनजाति से संबंधित थे। उनका परिवार प्रभावशाली और धनी था। खुद उमर एक कुशल व्यापारी थे और उन्होंने अरब और आस-पास के क्षेत्रों में खूब यात्रा की। वे अपनी शारीरिक शक्ति के लिए भी जाने जाते थे और कुश्ती और तीरंदाजी में माहिर थे। उमर अमीर अल-मुअमिनीन की उपाधि धारण करने वाले पहले ख़लीफा थे। image इस्लाम के प्रति गहरी नफरत, बहन ने बदली सोचउमर के मन में इस्लाम के प्रति गहरी नफ़रत थी और वह नए धर्म के प्रसार को रोकने के लिए दृढ़ संकल्प था। वह मक्का में इस्लाम के विरोध के नेताओं में से एक थे और कई मुसलमानों के उत्पीड़न के लिए जिम्मेदार थे। हालांकि, इस्लाम की शिक्षाओं के बाद उमर का जीवन बदल गया। इस्लाम अपनाने वाली उनकी बहन के साथ 616 ईसवी में गरमागरम बहस हुई। इसी दौरान उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया था और उससे कुरान की आयतें सुनने के बाद उमर का दिल नरम हो गया और उन्हें इस्लाम की सच्चाई का एहसास हुआ। उन्होंने इस्लाम अपना लिया। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। वह पैगंबर मुहम्मद के सबसे करीबी साथियों में से एक बन गए। उमर का वो काम, जो आज भी इस्लामी दुनिया के लिए मिसालउमर ने इस्लाम के शुरुआती प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सीरिया, फिलिस्तीन और मिस्र सहित कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब अबू बकर के बाद वह दूसरे खलीफा बने तो उन्होंने कई सुधार लागू किए और कई संस्थाएँ स्थापित कीं जो आज इस्लामी समाज का आधार बनती हैं। वह अपने न्यायपूर्ण शासन, अपनी धर्मपरायणता और अपनी विनम्रता के लिए जाने जाते थे। उनके नेतृत्व में, इस्लामी साम्राज्य का बहुत विस्तार हुआ और वह उस समय दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों में से एक बन गया। यही वजह है कि लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने उनकी इसी महानता के लिए जिक्र किया। image उमर ने ही कुरान का किताब के रूप में संकलन करायाउमर ने इस्लाम की शिक्षाओं को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कुरान को एक पुस्तक में संकलित करने का आदेश दिया और हदीस, पैगंबर मुहम्मद के कथनों और कार्यों के संरक्षण के लिए नियम बनाए। अपनी कई उपलब्धियों के बावजूद उमर को अपने शासनकाल के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनकी हत्या की कई कोशिशें हुई और कई आंतरिक और बाहरी संघर्षों से निपटना पड़ा। हालांकि, वह अपने विश्वास, न्याय और धर्म के लिए आजीवन प्रतिबद् रहे। जब मस्जिद में नमाज पढ़ते वक्त उमर की पीठ में घोंपा खंजरउमर की हत्या 644 ईसवी में मदीना में सुबह की नमाज़ पढ़ते वक्त कर दी गई थी। एक ईरानी गुलाम अबू लुलुआ फिरोज ने उन्हें छुरा घोंपकर मार डाला। उमर की मौत इस्लाम के लिए एक बहुत नुकसान था। हत्या क्यों की गई, उसकी वजह बहुत साफ नहीं है। मगर, कई मध्ययुगीन स्रोत इसे अपने अरब गुरु अल मुगीरा इब्न शुबा के साथ कर विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। एक सोर्स में यह भी कहा गया है कि अबू लुलुआ को उसके मालिक अल मुगीरा ने दो दिरहम प्रतिदिन का खराज कर देने के लिए मजबूर किया। इस कर का विरोध करने के लिए लुलुआ ने उमर की ओर रुख किया। हालांकि, उमर ने कर हटाने से इनकार कर दिया, जिससे अबू लुलुआ का गुस्सा भड़क उठा। एक दिन जब उमर मदीना की मस्जिद में सामूहिक प्रार्थना का नेतृत्व कर रहे थे तो उस वक्त घात लगाए अबू लुलुआ ने उन पर दोधारी खंजर से वार किया, जिससे उनकी मौत हो गई। image गांधी भी उमर से बेहद प्रभावित क्यों थेमहात्मा गांधी ने अपनी किताब यंग इंडिया उमर की तारीफ की है। उन्होंने लिखा है-उमर दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति थे और फिर भी वे करुणा से भरे हुए थे। वे एक शासक थे, लेकिन वे अपने लोगों के सेवक भी थे। गांधी ने गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के प्रति उमर की चिंता की भी प्रशंसा की और कहा-उमर एक न्यायप्रिय शासक थे जो अपनी प्रजा के कल्याण के बारे में गहराई से सोचते थे। वे अपनी विनम्रता और लोगों के प्रति सुलभता के लिए जाने जाते थे। क्या खत्म हो जाएगा वक्फ बोर्डलोकसभा से पास वक्फ संशोधन बिल राज्यसभा से पारित होता है तो इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद यह बिल कानून के रूप में देश में वक्फ संपत्तियों पर लागू हो जाएगा। इससे यह वक्फ बोर्ड की मनमानी शक्तियों पर अंकुश लग जाएगा। कानून के लागू होने के 6 महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति को सेंट्रल डेटाबेस पर रजिस्टर्ड करना अनिवार्य होगा। वक्फ को डोनेशन में दी गई हर जमीन का ऑनलाइन डेटाबेस होगा और वक्फ बोर्ड इन प्रॉपर्टीज के बारे में किसी बात को छिपा नहीं पाएगा। गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना जरूरी होगा।
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