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भारत के 2 राज्यों के छात्रों का US में पढ़ना मुश्किल, 20 साल में सबसे ज्यादा हुआ वीजा रिजेक्शन रेट

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US Student Visa Rejections: भारत के दो ऐसे राज्य हैं, जहां के छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ना मुश्किल हो चुका है। इसकी वजह है कि इन दोनों राज्यों के छात्रों का स्टूडेंट वीजा आवेदन सबसे ज्यादा रिजेक्ट किया जा रहा है। यहां जिन दो राज्यों की बात हो रही है, वो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश हैं। वीजा रिजेक्शन रेट ऐसे समय में बढ़ रहा है, जब इन दो तेलुगु भाषी राज्यों से सबसे ज्यादा छात्र अमेरिका में पढ़ने जा रहे हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के छात्रों के बीच अमेरिका में पढ़ाई काफी पॉपुलर भी है। हैदराबाद के स्टडी अब्रॉड कंसल्टेंट का कहना है कि अमेरिकी अधिकारी तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आधे से ज्यादा स्टूडेंट वीजा आवेदन रद्द कर रहे हैं। यह पिछले 20 सालों में सबसे ज्यादा है। यहां तक कि आइवी लीग यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाने वाले छात्रों को भी वीजा नहीं मिल रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए स्टडी अब्रॉड कंसल्टेंसी फर्म I20 Fever के अरविंद मंडुवा ने कहा कि जनवरी का महीना हमारे लिए सबसे बुरा था। आने वाले समर इनटेक को लेकर भी ऐसा ही लग रहा है। किन वजहों से रिजेक्ट हो रहा वीजा आवेदन?यहां सबसे ज्यादा हैरानी वाली बात ये है कि अमेरिकी वीजा अधिकारी ये भी नहीं बता रहे हैं कि स्टूडेंट वीजा आवेदन क्यों रिजेक्ट किया गया है। हालांकि, रिजेक्ट हुए आवेदनों की समीक्षा करने के बाद कंसल्टेंसीज का मानना है कि निजी जानकारी, पढ़ाई का इतिहास या सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स में छोटी-मोटी गलतियां ही रिजेक्शन की वजह हैं। पहले अगर मुख्य डॉक्यूमेंट्स सही होते थे, तो इस तरह की गलतियों को नजरअंदाज कर दिया जाता था। लेकिन ट्रंप की वापसी के बाद ज्यादा सख्ती बरती जा रही है। अमेरिका में बढ़ता रिजेक्शन रेटहाल ही में 2023-24 अकेडमिक ईयर को लेकर अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट जारी हुई थी। इसमें बताया गया था कि उस अकेडमिक ईयर 6.79 लाख F-1 Visa (स्टूडेंट वीजा) आवेदन आए, जिसमें से 2.79 लाख या कहें 41% रिजेक्ट कर दिए गए। इन रिजेक्ट किए गए आवेदनों में भारतीय छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा थी। छात्रों के वीजा की अवधि से ज्यादा समय तक अमेरिका में रहने की वजह से भी वीजा कम मिल रहे हैं। Way2 Abroad Consultancy के साहास युवराज ने कहा कि विदेश में पढ़ने के बारे में सोचने वाले छात्रों की संख्या अभी भी स्थिर है। लेकिन बहुत से छात्र अब हिचकिचा रहे हैं। वे ब्रिटेन और जर्मनी जैसे दूसरे देशों को देख रहे हैं। यूके में भी अब लंदन की जगह वेल्स और स्कॉटलैंड को ज्यादा पसंद किया जा रहा है।
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