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क्या नवरात्रि में नॉनवेज खाना पाप है?

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हिंदू धर्म में प्रमुख त्योहारों और व्रतों के दौरान भोजन के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है, विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान। इस समय नमक और अन्न का त्याग किया जाता है, और लोग सिर्फ सात्विक भोजन करते हैं। लेकिन क्यों नवरात्रि में नॉनवेज खाना पाप माना जाता है? क्यों इसे नवरात्रि के इस पवित्र समय में वर्जित किया गया है?

क्या नवरात्रि में नॉनवेज खाना पाप है?


नवरात्रि के नौ दिन बहुत ही पवित्र होते हैं, जिसमें शुद्धता और पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, जब व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखता है, तब वह भगवान से जुड़ने में सफल होता है, और पूजा-पाठ में उसका मन नहीं भटकता। अगर नवरात्रि के दौरान संतुलित आहार न लिया जाए, तो व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर काबू नहीं रख पाता और पूजा में विघ्न उत्पन्न होते हैं।


आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, तामसिक भोजन, यानी नॉनवेज, व्यक्ति में क्रोध, अहंकार, आलस्य और लालसा जैसी नकारात्मक भावनाएं उत्पन्न करता है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान हिंदू धर्म में नॉनवेज खाना पाप माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति को आध्यात्मिक रास्ते से भटका सकता है।

नवरात्रि में बंगाल में नॉनवेज खाने की प्रथा

भारत में कुछ समुदायों में नवरात्रि के दौरान मांसाहार खाने की परंपरा है। विशेष रूप से बंगाल में, शारदीय नवरात्रि के समय मांसाहार का प्रचलन है। बंगाली समुदाय का मानना है कि देवी माँ दुर्गा अपने बच्चों के साथ शरदीय नवरात्रि के दौरान अपने भक्तों के घर आती हैं और कुछ दिन उनके साथ बिताती हैं। इस कारण बंगाली परिवार अपने घरों में देवी माँ के लिए वे सभी पकवान तैयार करते हैं जो वे स्वयं खाते हैं, जिनमें मिठाइयाँ, मांस और मछली भी शामिल होते हैं। शारदीय नवरात्रि में बकरे की बलि के बाद प्राप्त मांस को प्रसाद माना जाता है।

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