हमे आए दिन नई नई तकनीकें देखने को मिलती रहती है। स्मार्टफोन, टीवी, बाइक, कार, कंप्यूटर सहित लगभग हर फील्ड में नए नए आविष्कार और फीचर्स देखने को मिल जाते हैं। आलम ये है कि फल सब्जी जैसी चीजों में भी प्रयोग होने लगे हैं। लोग फल-सब्जियों को हाइब्रिड कर उसकी भी नई नस्ल तैयार कर देते हैं। अब उदाहरण के लिए मार्केट में आए नीले केले को ही ले लीजिए।
आमतौर पर केले के बारे में सुनते ही हमारे मन में हरे पीले रंग के केले की छवि आ जाती है। आप ने भी इन रंगों के केलों को बहुत बार खाया होगा। लेकिन क्या आप ने कभी नीले रंग का केला टेस्ट किया है? यदि नहीं किया तो जरूर करना चाहिए। इसका टेस्ट सामान्य पीले केलों से काफी अलग और ज्यादा टेस्टी होता है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों नीले केले छाए हुए हैं। इन कैलो की बकायदा खेती होती है। ठीक वैसे ही जैसी पीले केलों की होती है। हालांकि इन्हें अधिकतर ऐसे देशों में ज्यादा उगाया जाता है जहां तापमान कम होता है। दक्षिण अमेरिका में इन नीले केलों की पैदावार सबसे अधिक होती है।
आपको जान हैरानी होगी कि नीले केले का स्वाद वैनिला आइसक्रीम जैसा लगता है। जब आप इसे खाएंगे तो आपको ऐसी फिलिंग आएगी जैसे आप वैनिला आइसक्रीम खा रहे हैं। वैसे इन केलों का इस्तेमाल भी अधिकतर आइसक्रीम, स्मूदी, और कई तरह के डेजर्ड में किया जाता है।

हवाई में इसे आइसक्रीम बनाना के नाम से जाना जाता है। वहीं फिजी में इसे हवाइयन बनाना बोलते हैं। इसके अलावा कुछ जगहों पर इसे ‘ब्लू जावा’ नाम से भी पुकारा जाता है। इसी तरह दुनिया के और भी हिस्सों में इसके अलग अलग नाम है।
यह केले जिस पेड़ पर उगते हैं उनकी लंबाई 6 मीटर तक हो सकती है। वहीं इन पेड़ों पर लगने वाले केलों की लंबाई 7 इंच तक जा सकती है। इनकी खेती थोड़ी धीमी रफ्तार से होती है। इन्हें खेत में लगाने से लेकर फल आने तक में लगभग दो साल का समय लग जाता है। इसलिए ये सामान्य केलों के मुकाबले महंगे भी होते हैं।
भारत में आपको नीले केले कम ही देखने को मिलेंगे। हालांकि विदेशों में आप इन्हें आसानी से देख सकते हैं। स्वाद के अलावा ये केले दिखने में भी बहुत आकर्षक लगते हैं। इन्हें देखकर ही लोगों की जुबान ललचाने लगती है। वैसे आपको यह नीले केले कैसे लगे हमे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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