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भारत में सांप पकड़ने वाले ही कई बार क्यों हो जाते हैं सर्प दंश का शिकार?

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image HANDOUT कोयंबटूर में सांप पकड़ने के दौरान सांप के काटने से संतोष की मौत हो गई.

कोयंबटूर में सात हज़ार से ज़्यादा सांप पकड़ने वाले संतोष की सांप के काटने से मौत हो गई.

शोधकर्ताओं का कहना है कि सांप पकड़ने की परिस्थितियां और इसके बारे में जानकारी नहीं होना ही इन मौतों का कारण है.

39 वर्षीय संतोष नाम के एक सांप पकड़ने वाले व्यक्ति को 17 मार्च को थोंडामुथुर में एक घर में कोबरा सांप ने काट लिया था. वो उसी सांप को पकड़ने गए थे.

इसके बाद संतोष को इलाज के लिए कोयम्बटूर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 19 मार्च की रात को उनकी मृत्यु हो गई.

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डॉक्टरों ने बताया कि सांप के ज़हर के कारण इलाज के दौरान हृदय गति रुकने से संतोष की मृत्यु हो गई.

तमिलनाडु वन विभाग के प्रमुख श्रीनिवास रेड्डी ने बीबीसी तमिल को बताया कि सांप पकड़ने के लिए उचित प्रशिक्षण और उपकरण देकर सांप पकड़ने वालों को विभाग के साथ जोड़ने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

साँप पकड़ने वालों की लगातार मौत

इसी तरह, मुरलीधरन नाम के शख़्स की पिछले साल अगस्त में कोयंबटूर में मौत हो गई थी और निर्मल नाम के व्यक्ति की तीन साल पहले सांप पकड़ने की कोशिश में मौत हो गई थी.

कुड्डालोर ज़िले के नेल्लीकुप्पम निवासी उमर अली को पिछले साल अप्रैल में एक सांप ने काट लिया था, जब वह उसे जंगल में छोड़ने जा रहे थे.

बीबीसी तमिल से बात करते हुए कोयंबटूर में में सांप के काटने से मारे गए वन्यजीव प्रेमी संतोष के मित्र राजन ने कहा, "पिछले बीस साल में संतोष ने 7,000 से अधिक सांप पकड़े और उन्हें जंगल में छोड़ा."

लेकिन, आज उनकी मृत्यु के कारण उनका परिवार ग़रीबी में है. उनकी दो बेटियों में से एक विकलांग है. राजन ने अनुरोध किया, "तमिलनाडु सरकार को उनके परिवार की किसी तरह से मदद करनी चाहिए."

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साँप पकड़ने में आदिवासियों और अन्य लोगों के बीच क्या अंतर है? image HANDOUT तमिलनाडु के कई इलाक़ों में सांप के काटने से मौत की ख़बरें आती रहती हैं.

मनोज कृष्णागिरी में संचालित ग्लोबल स्नेकबाइट एजुकेशन एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक हैं.

उन्होंने सर्पदंश अनुसंधान में डॉक्टरेट की उपाधि ली है और वर्तमान में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ रिसर्च पर काम कर रहे हैं.

वो कहते हैं कि हालांकि दुनिया में सांप के काटने की सबसे ज्यादा घटनाएं ऑस्ट्रेलिया में होती हैं, लेकिन वहां सांप के काटने से होने वाली मौतों की संख्या भारत की तुलना में काफी कम है.

मनोज कहते हैं कि ऐसा इसलिए है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में इस समस्या से निपटने का तरीका और इसके ज़हर को काटने वाली बेहतर दवाएं हैं.

उनका कहना है कि पारंपरिक रूप से सांप पकड़ने वाली जनजातियों के सांपों को पकड़ने के तरीके और अन्य जनजातियों के सांपों को पकड़ने के तरीके में कई अंतर हैं.

चेंगलपट्टू ज़िले के इरुलर जनजाति के मासी सदायन और वदिवेल को अमेरिका और थाईलैंड जैसे देशों में उन सरकारों के निमंत्रण पर सांप पकड़ने के लिए ले जाया गया है.

भारत के सर्प पुरुष के नाम से विख्यात रामुलस विट्टोगर कहते हैं कि वो 'सांप पकड़ने में अद्वितीय हैं'.

सांप पकड़ने वाली इरुलर सहकारी समिति, चेंगलपट्टू ज़िले के नेम्मेली में काम कर रही है. इसमें 350 से अधिक सदस्य हैं.

वो ओल्ड पेरुंगलथुर, न्यू पेरुंगलथुर, सेन्नेरी, मम्बक्कम, कायार और वेम्बेदु के वन क्षेत्रों में सांपों को पकड़ने, उनका ज़हर इकट्ठा करने और उन्हें वापस जंगल में छोड़ने के काम में लगे हुए हैं.

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सांप का फ़ोटो लेना क्यों बेहद ज़रूरी है? image Dr. Manoj डॉक्टर मनोज के मुताबिक़, सांप के काटने की सबसे ज़्यादा घटनाएं ऑस्ट्रेलिया में होती हैं, लेकिन इसकी वजह से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होती है.

भारतीय सरीसृप अनुसंधान, शिक्षा एवं संरक्षण केंद्र के संस्थापक और सरीसृप विज्ञानी रामेश्वरन मरियप्पन का मानना है कि यदि लोग जनजातियों की तरह जागरूकता के साथ काम करें, हालात को समझें और सांप के काटने पर क्या करना चाहिए, यह समझें, तो इससे मृत्यु दर को रोक सकते हैं.

उनका कहना है कि सांप पकड़ते समय वीडियो बनाने के उत्साह में बहुत से लोग इकट्ठा होते हैं, जो सांपों में इंसानों के प्रति भय और गुस्सा पैदा करता है और सांप पकड़ने वालों को ख़तरा पैदा हो जाता है.

बीबीसी तमिल से बात करते हुए रामेश्वरन मरियप्पन ने कहा, "सांप पकड़ने वालों को यह समझते हुए काम करना चाहिए कि हम सांपों को बचाने आए हैं और हमारा जीवन भी महत्वपूर्ण है."

उन्होंने कहा, "यदि आपको छोटा या बड़ा सांप काट ले, तो आपको बिना देरी किए अस्पताल जाना चाहिए."

उन्होंने यह भी कहा, "'सांप पकड़ने वाला' शब्द ग़लत है. उन्हें सांप को बचाने वाला या सांपों का रक्षक कहा जाना चाहिए.

यह 'सांप पकड़ने वाला' शब्द ही उन लोगों को सांप पकड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, जिन्हें सांपों के बारे में कोई बुनियादी जानकारी या अनुभव नहीं है."

image Rameswaran Mariappan रामेश्वरन मरियप्पन इंडियन सेंटर फ़ॉर रिप्टाइल रिसर्च, एजुकेशन एंड कंज़र्वेशन के संस्थापक हैं.

वैज्ञानिक मनोज सलाह देते हैं कि यदि आपको सांप ने काट लिया है, तो आपको तुरंत उसका फोटो खींच लेना चाहिए, ताकि पता चल सके कि यह किस प्रकार का सांप है.

उन्होंने कहा कि सामान्य रैटल स्नेक के अलावा अन्य सांपों के काटने से उस स्थान पर दर्द, सूजन और रंग में बदलाव हो सकता है.

उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि किसी भी सांप के काटने पर व्यक्ति को बिना किसी डर या चिंता के तुरंत अस्पताल जाना चाहिए, क्योंकि अगर व्यक्ति घबरा जाए तो ज़हर ख़ून के ज़रिए तेज़ी से फैल सकता है.

रामेश्वरन मरियप्पन का कहना है कि चूंकि सांप पकड़ने वाली जगहों पर आसानी से भीड़ जमा हो जाती है, इसलिए सांप पकड़ने वालों के पहुंचने तक सांप के डर और गुस्से की स्थिति में होने की संभावना होती है, इसलिए उसे संभालने में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए.

वैज्ञानिक मनोज कहते हैं, "पश्चिमी घाट की तराई के क्षेत्रों, जैसे कोयम्बटूर में बड़ी संख्या में किंग कोबरा पाए जाते हैं. यदि इसे छू लिया जाए तो बचना बहुत मुश्किल है. यदि किसी को कोबरा काट ले तो वह तभी बच सकता है, जब एक घंटे के भीतर उचित उपचार मिल जाए."

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सरकार से सांप पकड़ने वालों को बीमा मुहैया कराने का अनुरोध image HANDOUT ज़हरीले सांप के काटने के बाद एक घंटे के अंदर इलाज़ मिल जाए तो व्यक्ति की जान बच सकती है.

कोयम्बटूर के अमीन पिछले 27 साल से सांप पकड़ रहे हैं.

वो कहते हैं, "मैंने अब तक पकड़े गए सांपों का हिसाब नहीं रखा है; मैंने उनमें से किसी की भी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं की है."

अमीन का कहना है कि यह वन विभाग की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को बिना सोचे-समझे सांपों को पकड़ने की कोशिश करने से रोके, ताकि वे सोशल मीडिया पर शेयर ना कर सकें.

उनका कहना है, "मैंने एक दिन में चार साँप पकड़े. मैं अब भी उसी भय और सतर्कता के साथ सांपों को पकड़ता हूं, जैसे 27 साल पहले पहली बार पकड़ा था. हमारे जैसे पेशेवर साँप पकड़ने वालों को वन विभाग का पहचान पत्र और पश्चिमी देशों में साँप पकड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए."

"हमें यह तय करने की ज़रूरत है, कि केवल वन विभाग की अनुमति पाए लोग ही सांप पकड़ सकें."

image Getty Images दक्षिण भारत के मैसूर में एक घर के दरवाज़े पर मौजूद कोबरा (फ़ाइल फ़ोटो)

केरल और कर्नाटक राज्यों में, सांपों को पकड़ने में मदद के लिए वन विभागों ने मोबाइल ऐप विकसित किए गए हैं, जिससे सांप पकड़ने वालों और आम जनता को एक साथ लाया जा सके.

इसी प्रकार, वन्यजीव शोधकर्ता और पर्यावरणविद् वन विभाग से तमिलनाडु में भी सांप पकड़ने के प्रयासों में समन्वय करने की अपील कर रहे हैं.

बीबीसी तमिल ने तमिलनाडु वन विभाग के प्रमुख और प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास रेड्डी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "सांपों को पकड़ने में समन्वय के लिए सभी काम किए जा रहे हैं."

"जिस तरह केरल में नामक वेबसाइट और मोबाइल ऐप बनाया गया, उसी तरह यहां भी मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है."

उन्होंने कहा, "इसी प्रकार, साँप पकड़ने वालों को भी प्रशिक्षण देने और उन्हें ज़रूरी उपकरण उपलब्ध कराने के लिए भी एक योजना तैयार की गई है. इन कार्यों को पूरा करने में कुछ समय लगेगा."

"जब यह परियोजना लागू हो जाएगी तो ये सांप और इंसान दोनों के लिए बेहतर होगा."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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